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आज के मानवाधिकार नेटवर्क परिष्कृत, घने, और बहुमुखी हैं। परंतु, इन नेटवर्कों की गतिविधियों को आकार देने वाली बहसों तक पहुँच अभी भी भाषा, धन, विचारधारा, और सत्ता से प्रतिबंधित हैं।

यह रहा openGlobalRights, एक बहुभाषी, ऑनलाइन मंच जो सभी दृष्टिकोणों से मानव अधिकारों के काम पर बहस करने की ओर समर्पित है। हम नए और स्थापित लेखकों को बढ़ावा देते हैं, उन्नतिशील असहमतियों को उजागर करते हैं, विश्वभर के अधिवक्ताओं, पेशेवरों और विद्वानों के लेखों को प्रकाशित करते हैं।

हम वैश्विक दक्षिण के दृष्टिकोणों को उजागर करने के लिए विशेष प्रयास करते हैं, और सभी प्रकार के वैश्विक क्षेत्रों से बहस को प्रोत्साहित करते हैं।

हमारे लेख छोटे और पढ़ने योग्य होते हैं, परंतु इनमें अधिक जाँच-पड़ताल के लिए कई हाइपरलिंक उपस्थित रहते हैं।

 

By: Sunita Toor
English

#MeToo जैसे आंदोलन एकजुटता और सामूहिक डिजिटल कार्रवाई की शक्ति का प्रदर्शन करते हैं, लेकिन वे यह भी बताते हैं कि नारीवादी सक्रियता साझा मिशन के साथ एक अखंड आंदोलन ...

 

By: Tarini Manchanda
English | ਪੰਜਾਬੀ | Español

पंजाब में - जहाँ लगभग 32 प्रतिशत आबादी दलित है - दलित महिलाएँ भूमि को जोतने के अधिकार के लिए लड़ रही हैं, और जीत भी रही हैं।

By: Shreya Sen
English

न्यायिक शक्तिकरण ग़रीब और अलग-थलग समुदायों को विकास और निर्णय लेने में भागीदार बनाने में सक्षम करता है और नयी तकनीकें भारत में महिलाओं को प्रणाली में उपस्थित समस्याओं ...

 

By: Rachel Wahl
English | Español

मानवाधिकार कार्यकत्र्ता के सामने दोषियों के साथ काम करने का सबसे अच्छा तरीका कौन-सा हैघ् समझ के साथ-साथ ज़िम्मेदारी का भी ध्यान रखने के लिये नैतिक और नीति-संबंधी ...

 

By: Siddharth Peter De Souza
English

धर्म केवल आस्था के बारे में नहीं होता है, बल्कि मानव कल्याण के लिए उसकी क्षमता के लिए भी होता है। यही कारण है कि अपने धार्मिक विकल्पों का मूल्यांकन करने के लिए ...

 

By: Seema Guha
English

दलित समुदायों द्वारा कच्चे सीवेज को एकत्रित करने की प्रथा के विरूद्ध भारत में हिंदू धार्मिक नेता प्रबलता से अभियान चलाने के लिए अनिच्छुक रहे हैं, और यही कारण इस ...

 

By: Usha Ramanathan
English

हालांकि भारत आईसीसी में शामिल होने के लिए तैयार नहीं है,रोम संविधि कानून में उस सुधार को बढ़ावा देने में बहुत उपयोगी साबित हुई है जो हिंसा में राज्य सत्ता की सहभागिता ...

 

By: V. Suresh
English

संस्थागत अनुदान पर निर्भरता ने भारत में अधिकतर मानवाधिकार कार्यों का काफ़ी हद तक ग़ैर-राजनीतिकरण, मुद्रीकृत और भ्रष्ट कर दिया है। हालांकि मानवाधिकारों के अनुदान ...

 

By: Ravi Nair
English | العربية | Español

देश के सबसे जानकार मानव अधिकारों के विशेषज्ञों में से एक समझाते हैं कि उन मानवाधिकारों के कार्यों के लिए भारत किस तरह विदेशी अनुदान में रुकावट डालता है जिन्हें ...

 

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